October 21, 2021

महंत नरेंद्र गिरी की मौत के बाद मिले सूइसाइड नोट से मामला और उलझ गया है, लगाए जा रहे हैं कई कयास

After the death of Mahant Narendra Giri, the matter is further complicated by the suicide note, many speculations are being made

अमरेंद्र पांडेय की रिपोर्ट

अखाड़ा परिषद के अध्‍यक्ष श्री महंत नरेंद्र गिरी जी की संदिग्‍ध मौत सवालों के घेरे में आ चुका है। पुलिस के बताये अनुसार श्री महंथ के मृत्यु स्थल से एक ‘सूइसाइड नोट’ मिलने की खबर से माहौल अजीब सा हो गया है। यह सुसाइड नोट सात से आठ पन्‍नों पर लिखा हुआ बताया जा रहा है। सुसाइड नोट मे एक जगह वसीयतनामे की तरह कुछ उनके शिष्‍यों के नाम भी लिखे हुए हैं।आगे पुलिस द्वारा बताया गया कि गिरी जी ने लिखा है कि कुछ लोगों ने उनपर झूठे आरोप लगाकर उनको अपमानित किया।

यह बात अलग है, और कयास लगाया जा रहा है कि वह कौन सी बात थी जो महंत जी को काफी परेशान कर रही थी। ‘सूइसाइड नोट’ पूरे विस्‍तार से लिखा गया है। उसमे यह भी लिखा गया है कि महंत के धरातल पर या मठ मे ना रहने पर मठ, अखाड़े और हनुमान मंदिर का जिम्मा किसे सौंपना है और किसे नही। पुलिस द्वारा दी गयी सुसाइड नोट की फोरेंसिंक जांच चल रही है,जिसके बाद मालूम होगा कि नोट गलत है या सही।

स्‍थानीय मीडिया के अनुसार, करीब दोपहर 1 बजे महंत जी ने अपने शिष्‍यों के साथ भोजन किया था। उसके बाद रोज की तरह साढ़े तीन बजे तक आराम करने के लिए अपने कमरे मे चले गए। करीब शाम 5 बजे तक महंत जी अपने कमरे से बाहर नहीं आए तब एक शिष्‍य ने बहुत आवाज दी पर आवाज़ का कोई प्रतिक्रिया नही आई तो दरवाजा तोड़ा गया। भीतर के स्थिति को देख सभी दंग रह गए, महंत का शव पंखे से झूल रहा था।उसमे से एक बबलू नामक शिष्य ने पुलिस को यह सूचना दी।

बाघम्‍बरी मठ तक पुलिस के पहुंचने से पहले ही महंत के शव को पंखे से उतारकर बिस्‍तर पर रख दिया गया था। रिपोर्ट्स यह बताती हैं कि महंत के विश्राम पर जाने से पहले तक किसी ने भी उनको किसी तरह की परेशान वाली हालत में नहीं देखा था रोज़ाना की तरह उस दिन भी समान्य व्यवहार, वही मिठी बोली, वही मुस्कान उनके चेहरे से झलक रही थी। पुलिस ने मठ की तलाशी शुरू की। कथित तौर पर शव के पास से ही एक सूइसाइड नोट बरामद हुआ।

क्‍या है सुसाइड नोट में

पुलिस द्वारा महंत नरेंद्र गिरी के शव के पास से मिले ‘सूइसाइड नोट’ में योग गुरु स्‍वामी आनंद गिरि, लेटे हनुमान मंदिर के मुख्‍य पुजारी आद्या तिवारी और उनके बेटे संदीप तिवारी का मुख्य रूप से जिक्र है, जिनको महंथ के सुसाइड से जोड़ा जा रहा है। उस नोट में लिखी अधिकतर बातें मठ, मंदिर और गद्दी के उत्‍तराधिकारी को लेकर है। अपने उत्‍तराधिकारी के रूप में महंत जी ने बलवीर नामक शिष्‍य का जिक्र किया है।

चिट्ठी में उन्होंने लिखा है कि ‘मेरा सम्‍मान अब कम होने लगा है, जिसके बिना मैं नहीं रह सकता। अभी मैं डिप्रेशन में हूं। आनंद गिरि के कारण मुझे काफी बदनामी सहन करनी पड़ी। इसपर किस किस को सफाई दें। इससे अच्‍छा है कि दुनिया को अलविदा कह दिया जाए। कुछ प्यारे शिष्‍यों को छोड़कर सभी ने मेरी बदनामी की है। मेरे शिष्‍यों का ख्याल रखिएगा।’

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