October 4, 2022

यूपी में कांवड़ यात्रा के बाद अब मुहर्रम के जुलूस और ताजिया निकालने पर लगी रोक

क्षितिज यादव की रिपोर्ट

क्षितिज यादव की रिपोर्ट

लखनऊ। 25 जुलाई को होने वाली कावड़ यात्रा को सुप्रीम कोर्ट के फटकार के बाद उत्तर प्रदेश सरकार को रद्द करना पड़ा था। सुप्रीम कोर्ट के इस फटकार के बाद योगी सरकार कोरोना की तीसरी लहर की आशंका को देखते हुए इस्लामिक त्यौहार मुहर्रम में निकलने वाले जुलूस एवं ताजिया पर रोक लगा दी है। प्रदेश के डीजीपी मुकुल गोयल ने सभी पुलिस कमिश्नरों , एसएसपी, एसपी को इस संदर्भ में दिशा निर्देश जारी कर दिए हैं।

उत्तर प्रदेश डीजीपी मुकुल गोयल के मुताबिक मोहर्रम में निकलने वाले जुलूस में आतंकवादी खलल डाल सकते हैं। कुछ असामाजिक तत्व गतिरोध उत्पन्न कर सकते हैं। जिसे देखते हुए मोहर्रम में निकलने वाले जुलूस एवं ताजिया को रद्द करने का फैसला किया गया है। 19 अगस्त को मुहर्रम का जुलूस एवं ताजिया निकालना प्रस्तावित था।

क्यों खास है मुहर्रम

मोहर्रम का यह महीना इस्लाम धार्मिक कैलेंडर में नए वर्ष की शुरुआत का महीना है। इस महीने के दस तारीख को हजरत इमाम हुसैन की शहादत हुई थी। इस महीने के दसवे दिन इस्लाम धर्म के लोग जुलूस एवं ताजिया निकालकर हजरत इमाम हुसैन को श्रद्धांजलि देकर याद करते हैं। इस दिन रोजा रखने की भी परंपरा है।

भड़क उठे हैं मौलाना कल्बे जवाद

उत्तर प्रदेश सरकार ने रविवार को मुहर्रम को लेकर दिशा निर्देश जारी कर दिए हैं। इस सर्कुलर के एक हिस्से की भाषा को लेकर सिया समाज नाराज दिखाई पड़ रहा है। पुलिस प्रशासन के अभद्र भाषा वाले सर्कुलर को लेकर शिया धर्मगुरु मौलाना कल्बे जवाद नाराज हो गए हैं। मौलाना कल्बे जवाद ने प्रदेशभर के सभी मुहर्रम कमेटियों को पुलिस के किसी भी मीटिंग में भाग न लेने का फरमान जारी किया है। आगे मौलाना ने कहा कि इस बात को लेकर उत्तर प्रदेश के डीजीपी मुकुल गोयल को माफी मांगनी चाहिए।

पहले ही हाईकोर्ट कर चुका है इनकार

कोरोना की तीसरी लहर को मद्देनजर रखते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने किसी भी धार्मिक आयोजन को लेकर सरकार के दिशा निर्देशों का पालन करना जरूरी बताया था। मुहर्रम जुलूस एवं ताजिया निकालने संबंधी याचिका को खारिज करते हुए हाईकोर्ट ने कहा था कि सरकार के दिशा निर्देश सबके लिए एक समान है। किसी से धार्मिक भेदभाव नहीं किया जाएगा।

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