October 4, 2022

ब्रिटेन, रूस और अब अमेरिका… सभी ने अफगानिस्तान में अपने हाथ जलाए और सीख लिया सबक, अब चीन की बारी

Britain, Russia and now America… all burnt their hands in Afghanistan and learned the lesson, now it is the turn of China

टि्वंकल की रिपोर्ट

ब्रिटेन ने दो सदी पहले ही अफगानिस्तान से एक बड़ा सबक सीख लिया था। फिर पिछली सदी में सोवियत रूस ने और अब अमेरिका भी अफगानिस्तान में अपने हाथ जला कर बहुत कुछ सीख चुका है। परंतु चीन तालिबान के काबुल पर अधिकार से काफी खुश नजर आ रहा है।

ब्रिटेन, सोवियत रूस, अमेरिका और चीन का रुख

ब्रिटेन- ब्रिटेन ने कहा कि तालिबान को अफगानिस्तान सरकार की मान्यता नहीं दी जा सकती। उसने तालिबान के नियंत्रण के अत्यधिक आलोचना की है।

रूस- रूस ने तालिबान से संबंध को लेकर अभी तक अपने पत्ते नहीं खोले हैं। रूस ने कहा है कि हमारे दूतावास के अधिकारी तालिबान के अधिकारियों से बातचीत कर रहे हैं। तालिबान के प्रति रूस के रुख का फैसला बाद में होगा।

अमेरिका- अमेरिका शुरू से ही अफगानिस्तान का समर्थक रहा है। कुछ दिन पहले राष्ट्रपति बाइडेन ने अफगानिस्तान को तालिबान से स्वयं लड़ने की प्रेरणा दी। लेकिन तालिबान के कब्जे को लेकर अमेरिका ने कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया है।

चीन- चीन अफगानिस्तान में तालिबान से दोस्ताना संबंध बना रहा है। और उसने अपने दूतावास बंद न करने का फैसला लिया है। दरअसल चीन की नजरें मध्य एशिया तक पहुंचने के लिए अफगानिस्तान का इस्तेमाल करने पर है।

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