October 4, 2022

एक भी अंक नहीं लाने वाले 100 बच्चों की भी नैया पार

अहमदाबाद. कोरोना काल में गुजरात माध्यमिक उच्च माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की मूल्यांकन नीति ने पढ़ाई में फिसड्डी कई विद्यार्थियों की नैया भी पार लगा दी। हाल ही जारी 10वीं बोर्ड के नतीजों में करीब 100 बच्चे ऐसे हैं, जो शून्य अंक हासिल कर भी पास हो गए। इन्हें 198 ग्रेस अंक दिए गए। यानी इन बच्चों ने अपनी तरफ से एक भी अंक हासिल नहीं किया।

ऐसे हर बच्चे को सभी 6 विषयों में 33-33 ग्रेस अंक देकर पास किया गया। इससे पहले तक गुजरात बोर्ड में 10वीं में कम से कम 40 फीसदी अंक लाने वाले बच्चों को सिर्फ दो विषयों में 24 तक ग्रेस अंक देने का नियम रहा है। कोरोना के मद्देनजर इस वर्ष दसवीं बोर्ड के विद्यार्थियों के लिए विशेष मूल्यांकन नीति अपनाई गई।

इसके तहत 9वीं कक्षा के 40 प्रतिशत, 10वीं के यूनिट टेस्ट के 40 प्रतिशत और इंटरनल असेसमेंट के 20 प्रतिशत अंकों के आधार पर परिणाम तैयार किया गया। बोर्ड के एक अधिकारी के मुताबिक 100 विद्यार्थियों का प्रदर्शन इतना खराब रहा कि उन्हें सभी विषयों में पासिंग मार्क्स देने पड़े।

रिजल्ट से पूर्व बोर्ड ने हाथ बांध लिए थे। बोर्ड के अनुसार 1.60 लाख विद्यार्थियों को 60 ग्रेस अंक दिए । करीब 45 हजार को 60 से 100 के बीच ग्रेस अंक मिले। ढाई से 3 लाख विद्यार्थियों को प्रमोट करने के लिए ग्रेस अंक देने पड़े, क्योंकि बोर्ड ने तय किया था कि किसी विद्यार्थी को फेल नहीं किया जाएगा।

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