October 5, 2022

अत्याधुनिक हथियारों से लैस अफगानिस्तान की फौज बिना लड़े आखिर कैसे ढह गई?

How did the Afghan army, equipped with state-of-the-art weapons, collapse without a fight?

टि्वंकल की रिपोर्ट

जनता का विरोधी भाव

तालिबान का अफ़गानिस्तान की राजधानी काबुल पर कब्जा करने के साथ ही लोगों में दहशत फैल गई और अफ़गानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी और उपराष्ट्रपति अमरुल्ला सालेह अपना मुल्क़ छोड़कर भाग खड़े हुए | जिससे आवाम में विरोध का भाव शुरू हो गया है और देश में भ्रष्टाचार और आतंकवाद तेजी से फैल रहा है|

बाइडेन का भरोसा

पिछले महीने जब अमेरिका के राष्ट्रपति बाइडेन से पूछा कि क्या तालिबान पुनः अफ़गानिस्तान पर अपना कब्जा कर सकती है, तब बाइडेन ने इस बात से स्पष्ट मना कर दिया और कहा कि अफ़गानिस्तान के पास सैन्य शक्ति अधिक है और वे सभी अमेरिका से प्रशिक्षित हैं, उन्हें बेहतर हथियार की सुविधा भी है और उनमें 75 प्रतिशत सेना हमारी हैं| अब सवाल यह उठता है कि इतने मजबूत सैन्य बल और उच्च प्रशिक्षण के बावजूद भी तालिबान ने कैसे काबुल पर अधिकार कर लिया।

अफ़गानी सैनिकों का समर्पण

दरअसल तालिबान के लड़ाके इतनी तेजी से अफ़गानिस्तान के मुल्क में घुसे और काबुल पर कब्जा कर लिया कि अफ़गानिस्तान समझ ही नहीं पाया। जबकि अफ़गानिस्तान के पास वायु सेना है और तालिबान के पास नहीं है। अफ़गानिस्तान कई मामलों में तालिबान से सशक्त है उसकी सैन्य शक्ति की तालिबान के पास कोई बराबरी ही नहीं है।
परंतु जब तालिबान ने काबुल पर कब्जा किया, तो अफ़गानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी और उपराष्ट्रपति अमरुल्ला सालेह के देश छोड़कर जाने से अफ़गानिस्तान की सैन्य शक्ति असहाय और निशस्त्र हो गई, उसके सैनिक कमजोर पड़ गये। कुछ सैनिक वहां से भाग गए और कईयों ने आत्मसमर्पण कर दिया।

अमेरिका का हाथ पीछे करना

तालिबान के सशक्त होने का मुख्य कारण अमेरिका का अपने हाथ पीछे खींचने को बताया जा रहा है। अमेरिका ने अपने सैनिकों को बाहर निकलवाया, जिससे अफ़गनिस्तान सरकार असहाय हो गई और दहशत के इस माहौल में अपना सुध-बुध खो बैठी, जिससे तालिबान का प्रभावी होना आसान हो गया।

तालिबान का सैन्य क्षमता में बढ़ावा

तालिबान ने राजनीतिक दृष्टि से सोचा और सबसे पहले काबुल पर अधिकार किया, और धीरे-धीरे उसने शेष जगह को कब्जे में किया और सशक्त होता गया। उसने अपने 5000 सैनिकों को जेल से छुड़वा कर अपनी सैन्य शक्ति मजबूत कर ली है और उसे पाकिस्तान से भी सैन्य शक्ति और आर्थिक सहायता प्राप्त है।

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