October 4, 2022

अफगानिस्तान पर हुआ तालिबान का पूर्ण कब्जा तो भारत पर क्या पड़ेगा प्रभाव

If Taliban completely capture Afghanistan, what will be the effect on India

संपादकीय-क्षितिज यादव

भारत- अफगान सम्बन्ध। आमतौर पर भारत के पड़ोसी देशों में चीन और पाकिस्तान की तुलना में भारत का अफगानिस्तान से संबंध मित्रवत रहा है। इस समय अफगानिस्तान अपने ही देश के आतंकी संगठन तालिबान का गुलाम बनने के कगार पर पहुंच चुका है। मीडिया रिपोर्टों की माने ,अगर यही ट्रेंड रहा तो आने वाले एक महीने में पूर्ण अफगानिस्तान पर तालिबान का कब्जा हो जाएगा।

अफगानिस्तानी सैनिकों एवं तालिबानियों के बीच चल रहे इस युद्ध में तालिबान ने अबतक देश के लगभग 90% भूभाग पर अपना अधिकार कर लिया है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर पूर्ण अफगानिस्तान पर तालिबान का कब्जा हो जाएगा तो इसका भारत पर क्या असर पड़ेगा।

आतंकी गतिविधियां बढ़ेंगी, पाकिस्तान को मिलेगी ताकत

तालिबान को पाकिस्तान का हितैषी माना जाता है। पिछले कुछ समय से अफगान सरकार पाकिस्तान पर तालिबानियों की मदद करने का आरोप भी लगाती आ रही है। ऐसे में अगर अफगानिस्तान में तालिबानियों की सरकार बनती है तो निश्चित ही पाकिस्तान में पनप रहे भारत विरोधी आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तैयबा जैसे संगठनों को भारत पर प्रहार करने के लिए नई जमीन मिल जाएगी।

वहीं दूसरी तरफ पाकिस्तान एवं तालिबानियों मे अच्छे संबंध होने के कारण अफगानिस्तान में पाकिस्तानी सेना एवं खुफिया एजेंसियों की दखलअंदाजी बढ़ जाएगी। ऐसी स्थिति में पाकिस्तान को मदद मिलेगी। इसका भारत के लिए एक बुरा असर यह भी पड़ेगा कि पिछले दो दशकों से भारत एवं अफगानिस्तान सरकारों के बीच विकास को लेकर जो बुनियादी ढांचे बनाए गए थे वह सिमट जाएंगे।

क्या करें भारत?

अगर हम अखबारों को खंगाले तो भारत के पास विकल्प बहुत सीमित नजर आते हैं। वैसे तो हर विकल्प में भारत के लिए इधर कुआं तो उधर खाई जैसी स्थिति है। परंतु फिर भी हम कुछ विकल्पों पर चर्चा करते हैं-
•क्योंकि भारत एक लोकतांत्रिक देश है तो इसलिए उसे अफगानिस्तान के लोकतांत्रिक सरकार का राजनीतिक एवं मानवीय सहायता करनी चाहिए।

•भारत के लिए दूसरा विकल्प यह दिखता है कि भारत सरकार को अफगानिस्तानी सैनिकों को ईरान के रास्ते गोला बारूद पहुंचा कर सैन्य मदद करनी चाहिए परंतु ऐसी स्थिति में भारत स्वयं इस युद्ध में कूद पड़ेगा।

•एक पड़ोसी देश के रूप में भारत के लिए तीसरा एवं अमानवीय विकल्प यह हो सकता है कि भारत भी तालिबान के साथ हो जाए और उनसे संपर्क स्थापित करें। तालिबान का पाकिस्तान के करीब होने के कारण भारत द्वारा ऐसा करना काफी मुश्किल भी है। यह विकल्प आगे चलकर भारत के लिए एक छलावा भी हो सकता है।

•चौथा विकल्प शायद आपको बताने की जरूरत नहीं है क्योंकि कुछ ना करने की स्थिति में भारत उस विकल्प का अनुसरण तो कर ही रहा है। वैसे वह विकल्प “इंतजार करो और देखो कौन जीत रहा है बाद में उसी के साथ हो जाने वाली है।”परंतु यह भारत की लोकतांत्रिक सोच की प्रासंगिकता पर आघात करता है।

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