October 20, 2021

दिल्ली-जयपुर के बीच तैयार हो सकता है भारत का पहला ई-हाईवे, अपने आप चार्ज हो जाएगी ई-व्हीकल

India's first e-highway may be ready between Delhi-Jaipur, e-vehicle will be charged automatically

अमरेंद्र पांडेय की रिपोर्ट

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने दिल्ली और जयपुर के बीच ई-हाईवे के निर्माण को लेकर बड़ा बयान दिया है। आगे उन्होंने कहा कि, इसके लिए विदेशी कंपनियों से बात चल रही है इस ख़बर को सुनते हीं भारत वासियों के दिल मे खुशी की लहर दोड़ सी गयी है। आपको बता दें कि, दुनियाभर में इन दिनों इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या मे बढ़ोतरी हुई है, जिसमे ‘ईलोन मस्क’ की tesla, google, tata से लेकर सभी इलेक्ट्रिक पर चलने वाली गाड़ियों का निर्माण तेजी से कर रहे हैं।

कार्बन उत्सर्जन को कम करने के लिए आम जनता भी इन कंपनियों का सहयोग कर रही हैं, और इनके द्वारा बनाए गए e-vihcle को खरीद महंगे पेट्रोल से छुटकारा पाने मे लगे हुए हैं। लेकिन सबसे बड़ी समस्या यह है कि ई-व्हीकल ज्यादा लंबी दूरी पर नही जा सकती, जिसके लिए पेट्रोल पंप पर चार्जिंग स्टेशन बनाये जाने का विचार है, लेकिन ई व्हीकल को चार्ज करने मे काफी लंबा वक्त लग सकता है, जिसका एक ही निष्कर्ष निकलता है कि क्यों न चलते चलते हीं अपने ई-व्हीकल को चार्ज कर लिया जाए। कई देशों के बड़े बड़े शहरों मे ई- हाईवे पर गाड़िया दोड़ने चालू कर दी हैं।

इस समस्या का हल करते हुए केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने आश्वाशन दिया है, और कहा कि, जल्द ही दिल्ली से जयपुर तक इलेक्ट्रिक- हाइवे के निर्माण मे काम लगना शुरू हो जाएगा, इसके लिए एक विदेशी कंपनी से बात चल रही है। आगे नितिन गडकरी जी ने कहा, ‘‘दिल्ली से जयपुर तक इलेक्ट्रिक-हाईवे बनाना मेरा सपना है।’’ उन्होंने कहा कि एक परिवहन मंत्री के रूप में, वे देश से पेट्रोल और डीजल के उपयोगिता को खत्म करने का संकल्प ले लिया हूँ।

उन्होंने देश में ई-वाहनों को बढ़ावा देने और उसके लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर बनाने की तैयारी भी चल रही है। इन हाईवे पर पारंपरिक गाड़ियां और इलेक्ट्रिक गाड़ियां साथ मे चल सकती हैं। जहां पेट्रोल-डीजल से चलने वाली गाड़ियों को हाईवे के बीच में हीं रुककर ईधन भराने के लिए रुकना पड़ता है, वहीं इलेक्ट्रिक गाडियाँ बिना रुके हाईवे पर चलती रह सकती हैं।

तीन तरह के तकनीको का होता है इस्तेमाल

इलेक्ट्रिक हाईवे पर अब तक किसी वाहन को चार्ज करने में तीन तरह की तकनीकों का इस्तेमाल होता आ रहा है।
• पहला हाईवे पर ओवरहेड केबल के इस्तेमाल करके चलते हुए अपनी गाड़ियों को चार्ज करना, इसे तकनीक को पैंटोग्राफ मॉडल कहा जाता है, इसमे चार्जिंग के लिए ई-व्हीकल के ऊपर एक कॉन्टैक्ट आर्म लगा दिया जाता है। भारत में इसी तकनीक को लाने की बात चल रही है। फिल्हाल समय में जर्मनी अपनी इलेक्ट्रिक-सड़कों पर इसी तरह के तकनीक का इस्तेमाल कर रहा है।

• दूसरा है कंडक्शन मॉडल, इसमे गाड़ियों के कॉन्टैक्ट आर्म नीचे की तरफ लगे होते हैं और ये सड़क से चार्जिंग करती हुई चलती है, इसके लिए इलेक्ट्रोमैग्नेटिक करंट पैदा करती हैं। इसमे खास सड़कों के निर्माण की जरूरत होती है, जिसमे महंगा खर्च आता है।

• तीसरा है इंडक्शन मॉडल, जिसमे वाहनों को चार्जिंग के लिए किसी भी तरह के कॉन्टैक्ट आर्म की जरूरत नही होती है। इसमे वाहन सड़क और गाड़ी में लगी इलेक्ट्रो-मैग्नेटिक तकनीक द्वारा चार्ज होती है। इस तकनीक का इस्तेमाल स्वीडन अपने ई-हाईवे मे करता है। अनेक देश अपने e- सड़क पर ऐसे तकनीकों का इस्तेमाल कर रही हैं।

Leave a Reply