October 3, 2022

आइये जाने शरिया कानून के बारे मे, क्या होता है शरीयत कानून

Let's know about Sharia law, what happens, Sharia law

अमरेंद्र पांडेय की रिपोर्ट

मुस्लिम स्वीय विधि (शरिया कानून ) अधिनियम 1937:
मुसलमानों के सभी मामलों को इस्लामिक कानून के मुताबिक निपटारा करने के लिए अंग्रेजों ने 1937 में ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की स्थापना कर यह कानून लाया था। पूरा इस्लामिक धर्म शरिया कानून के तौर-तरीकों, और कानूनों, कायदों को मानते हैं।

सातवीं सदी में जब सऊदी अरब में इस्लामिक धर्म का प्रचार प्रसार तेजी से था। उस टाइम वहां समाज कबीलों में बटा हुआ था, हर कबीलों का अपना अपना कानून था, लेकिन सब पर ऐसा इस्लाम धर्म के कानून का असर हुआ कि सब ने इस्लाम धर्म में प्रख्यात शरिया कानून को कबीले वालों ने अपना लिया। कुरान के इन नियमों को ही शरिया कानून का नाम दिया गया।

सातवीं सदी में अरब देश के मदीना मे इस्लाम की स्थापना के साथ में इस्लाम धर्म का प्रचार प्रसार तेजी से होने लगा। कानून में इस्लामी समाज के उन लोगों का एक समूहैै , जिससे पूरी दुनिया में इस्लामिक समाज संचालित किया जाता है ।

शरीयत कानून इस्लाम के भीतर सामाजिक राजनीतिक आर्थिक धार्मिक और सांस्कृतिक रूप से जीवन जीने का व्याख्या करता है। हर समाज के भीतर लोगों के रहने के तौर-तरीकों को जैसे नियम बनाए गए हैं। वैसे ही इस्लाम धर्म में मुसलमानों के लिए भी कुछ नियम बनाए गए हैं, जिससे कि हम शरीयत कानून कहते हैं।

शरिया कानून में अच्छाइयां भी हैं और उसमें बहुत सारी बुराइयां भी है, जैसे कि कुछ इस्लामी कट्टरपंथियों ने मोहम्मद पैगंबर साहब के दिए निर्देश कुरान शरीफ के बातों को उलटफेर कर पेश किया गया है । अधिकतर इसमें महिला वर्ग को अधिक प्रताड़ित किया जाता है, जैसे कि अकेले वह घर से बाहर नहीं निकल सकते हैं शिक्षा ग्रहण के लिए किसी लड़कों के साथ नहीं बैठ सकती इत्यादि इत्यादि जोकि सरासर गलत है।

सरिया एक अरबी शब्द है जिसका मतलब है “अल्लाह का दिखाया रास्ता और उसके बनाए हुए नियम” कुरान के मुताबिक सरिया सिर्फ एक कानून व्यवस्था ही नहीं बल्कि मुसलमानों की पूरी जीवन शैली है, लेकिन आज के कुछ इस्लाम धर्म को मानने वाले लोग अपने को शेष दिखाने के लिए शरिया कानून में फेरबदल कर महिलाओं के ऊपर ही थोप दिया है।

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