November 27, 2021

नव रात्रि विशेष : माँ दुर्गा पालकी से आएगी आपके द्वारा

पंडित सुधांशु तिवारी

पंडित सुधांशु तिवारी

हिन्दू वैदिक पंचांग के अनुसार अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शारदीय नवरात्र आरम्भ होते हैं। इन्हें अश्विन नवरात्र भी कहते हैं। नवरात्र के नौ दिन देवी मां की उपासना के लिए बहुत विशेष महत्व रखते हैं। जगत के कल्याण के लिए आदि शक्ति ने अपने तेज को नौ अलग-अलग रूपों में प्रकट किया, जिन्हें हम नव-दुर्गा कहते हैं।

नवरात्री का समय माँ दुर्गा के इन्हीं नौ रूपों की उपासना का समय होता है। जिसमें प्रत्येक दिन देवी माँ के अलग अलग रूप की पूजा की जाती है। नवरात्री में देवी के नौ रूपों में से प्रथम दिन “मां शैलपुत्री” की पूजा की जाती है दूसरे दिन “ब्रह्मचारिणी” स्वरुप की तीसरे दिन “चंद्रघंटा” चौथे दिन “कुष्मांडा” पांचवे दिन “स्कन्दमाता” छटे दिन “कात्यायनी” सातवे दिन “कालरात्रि” आठवे दिन “महागौरी” तथा नवरात्रि के नौवे दिन मां “सिद्धिदात्री” की पूजा की जाती है।

कन्या पूजन नवरात्रि का एक बहुत महत्वपूर्ण भाग है जिसमे छोटी कन्याओं को देवी मां के स्वरुप में मानकर उन्हें विभिन व्यंजनों का भोग लगाकर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया जाता है। तो जो लोग अष्टमी के दिन कन्या पूजन करते हैं। वह इस बार 13 अक्टूबर को कन्या पूजन करें और जो लोग नवमी में कन्या पूजन करते हैं वे इस बार 14 अक्टूबर को कन्या पूजन करें।

इस बार विशेष
इस बार शारदीय नवरात्र 7 अक्टूबर गुरूवार से आरम्भ हो रहे हैं ,और 7 से 14 तारिख के बीच नवरात्र उपस्थित रहेंगे। इस बार नवरात्रि में “चतुर्थी तिथि” क्षय होने के कारण नवरात्री का एक दिन घट रहा है। इसलिए इस बार नवरात्री का पर्व आठ दिन ही रहेगा। इस बार नवरात्रि के क्रम को देखें तो 7 अक्टूबर को प्रतिपदा यानि के पहला नवरात्रा होगा।

इसी दिन घटस्थापना की जाएगी, इसके बाद 8 तारिख को द्वितीया 9 तारिख को तृतीया और चतुर्थी एक साथ होंगी 10 तारिख को पंचमी 11 तारिख को षष्ठी 12 तारिख को सप्तमी 13 अक्टूबर को दुर्गाष्टमी और 14 तारिख को महानवमी के साथ नवरात्री का समापन होगा और 15 अक्टूबर को विजय- दशमी का पर्व मनाया जायेगा।

7 अक्टूबर से नवरात्रि शुरू हो 14 अक्टूबर को महानवमी मनाई जाएगी और 15 अक्टूबर को दशहरे का त्योहार मनाया जाएगा. 14 अक्टूबर तक चलने वाले इन दिनों में मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है. शास्त्रों में मां दुर्गा के नौ रूपों का बखान किया गया है. नवरात्र के दिनों में मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा करने से विशेष पुण्य मिलता है. मान्यता है कि मां दुर्गा अपने भक्तों के हर कष्ट हर लेती हैं. ज्योतिषी पंडित सुधांशु तिवारी से जानते हैं कि इस बार मां दुर्गा किस वाहन पर सवार होकर आएंगी और इस वाहन का क्या संकेत होता है.

मां दुर्गा की सवारी का महत्व
मां दुर्गा के हर वाहन का अपना अलग-अलग महत्व होता है. शास्त्रों में ऐसा वर्णन है कि जब मां दुर्गा डोली पर सवार होकर आती हैं राजनैतिक उथल-पुथल की स्थिति बनती है. ये प्रभाव सिर्फ भारत नहीं बल्कि पूरी दुनिया पर पड़ सकता है. ये प्राकृतिक आपदाएं आने का भी संकेत होता है.

महामारी फैलती है और लोगों के बीमार होने की संभावना बढ़ जाती है. माता का डोली पर आना बहुत ज्यादा शुभ संकेत नहीं माना जाता है लेकिन जो लोग सच्चे मन से मां दुर्गा की आराधना करते हैं उन पर ये अशुभ प्रभाव नहीं पड़ता है. नवरात्रि में मां दुर्गा की आराधना से मां की कृपा भक्तों पर बनी रहती है. 

इस बार घट स्थापना का शुभ समय

इस बार घट स्थापना के लिए दो विशेष मुहूर्त हैं पहला मुहूर्त 7 तारिख की सुबह 6:17 से 7:44 के बीच है इस समय शुभ चौघड़िया मुहूर्त उपस्थित होगा। इसके बाद 7 तारिख की सुबह 9:30 बजे से स्थिर लग्न का शुभ मुहूर्त शुरू हो जायेगा जो 11:43 बजे तक रहेगा इसलिए इस बार घट स्थापना के लिए सुबह 9:30 से 11:43 के बीच का समय भी श्रेष्ठ रहेगा इस बीच में कभी भी घट स्थापना कर सकते हैं। घट स्थापना का पहला मुहूर्त सुबह 6:17 से 7:44 तक घट स्थापना का दूसरा मुहूर्त सुबह 9:30 से 11:43 तक रहेगा।

माता रानी की पूजा में लगने वाली पूजन सामग्री

मां दुर्गा की प्रतिमा या फोटो, सिंदूर, केसर, कपूर, धूप,वस्त्र, दर्पण, कंघी, कंगन-चूड़ी, सुगंधित तेल, चौकी, चौकी के लिए लाल कपड़ा, पानी वाला जटायुक्त नारियल, दुर्गासप्‍तशती किताब, बंदनवार आम के पत्तों का, पुष्प, दूर्वा, मेंहदी, बिंदी, सुपारी साबुत, हल्दी की गांठ और पिसी हुई हल्दी, पटरा, आसन, पांच मेवा, घी, लोबान,गुग्गुल, लौंग, कमल गट्टा,सुपारी, कपूर. और हवन कुंड, चौकी, रोली, मौली, पुष्पहार, बेलपत्र, कमलगट्टा, दीपक, दीपबत्ती, नैवेद्य, शहद, शक्कर, पंचमेवा, जायफल, लाल रंग की गोटेदार चुनरीलाल रेशमी चूड़ियां, सिंदूर, आम के पत्‍ते, लाल वस्त्र, लंबी बत्ती के लिए रुई या बत्ती, धूप, अगरबत्ती, माचिस, कलश, साफ चावल, कुमकुम,मौली, श्रृंगार का सामान, दीपक, घी/ तेल ,फूल, फूलों का हार, पान, सुपारी, लाल झंडा, लौंग, इलायची, बताशे या मिसरी, असली कपूर, उपले, फल व मिठाई, दुर्गा चालीसा व आरती की किताब,कलावा, मेवे, हवन के लिए आम की लकड़ी, जौ आदि।

Leave a Reply