October 5, 2022

‘ज्ञानवापी मस्जिद में दी जाये पूजा की अनुमति ,शीघ्र की जाये प्रतिमाओं की स्थापना’

'Permission should be given for worship in Gyanvapi Masjid, installation of idols should be done soon'

प्रखर दुबे की रिपोर्ट

Varanasi: अयोध्या में बाबरी मस्जिद के ध्वस्त होने और राम जन्मभूमि के पक्ष में फैसला आने के पश्चात राम मंदिर के निर्माण के साथ ही साथ काशी और मथुरा का मामला भी तूल पकड़ता जा रहा है।

काशी में बाबा विश्वनाथ मंदिर की ज़मीन पर कब्ज़ा कर बनाई गई ज्ञानवापी मस्जिद और श्रीकृष्ण जन्मभूमि में शाही ईदगाह मस्जिद को लेकर विवाद जारी है। इसी बीच महिलाओं द्वारा अदालत में याचिका डाल कर काशी के ज्ञानवापी मस्जिद में पूजा की अनुमति माँगी गई है।

5 हिन्दू महिलाओं ने दायर की याचिका

पाँच हिन्दू महिलाओं ने अदालत से अनुमति माँगी है कि उन्हें पुराने मंदिर परिसर में प्रतिमाएँ स्थापित कर पूजा की अनुमति दी जाए। उन्होंने मुग़ल काल में मंदिर की स्थिति में परिवर्तन कर इसे मस्जिद बनाए जाने का आरोप लगाते हुए कहा कि औरंगज़ेब के शासनकाल में बाबा विश्वनाथ मंदिर को नुकसान पहुँचाया गया। वाराणसी सीनियर सिविल जज रवि कुमार दिवाकर की अदालत में ये मामला दायर किया गया है।

अब इस मामले में सिविल कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार, ज्ञानवापी मस्जिद प्रबंध कमिटी और काशी विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट से जवाब माँगा है। ये याचिका अधिवक्ता हरिशंकर जैन और विष्णुशंकर जैन के जरिए दायर की गई है। राखी सिंह याचिकाकर्ता महिलाओं का नेतृत्व कर रही हैं।

जब परिसर ही मंदिर का है तो प्रतिमा रखने में क्यों आपत्ति

इसमें दावा किया गया है कि, ये मंदिर का ही परिसर है, यहाँ हिन्दू श्रद्धालुओं को दृश्य व अदृश्य देवी-देवताओं की पूजा का अधिकार प्रदान करना है।

वकीलों ने यह भी कहा कि देवी गौरी के साथ ही भगवान गणेश और हनुमान की मूर्तियों को सजा कर मंदिर में नंदी जी की पूजा करने का अधिकार माँगा गया है। उन्होंने इसे वादी का मूलभूत अधिकार बताते हुए कहा कि इसमें दखल नहीं दिया जाना चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि वादी की तरफ से एक और याचिका दायर की गई है, जिसमें एडवोकेट कमिश्वर स्थल के निरीक्षण की रिपोर्ट का निवेदन किया गया है।

इस मामले में उत्तर प्रदेश सरकार को भी प्रतिवादी बनाया गया है, इसीलिए कोर्ट ने कहा कि उनका पक्ष सुनना भी ज़रूरी है। प्रतिवादियों पर नोटिस जारी करने की अपील वादी द्वारा 3 दिनों के भीतर की जाएगी। तत्पश्चात आपत्तियों पर भी विचार विमर्श किया जाएगा।

इसके लिए 10 सितम्बर, 2021 की तारीख़ निर्धारित की गई है। याचिकाकर्ताओं में लक्ष्मी देवी, सीता शाहू, मंजू व्यास व रेखा पाठक शामिल हैं।

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