June 14, 2021

बंद कमरे में 30 मिनट तक तेज प्रताप और जीतनराम मांझी की मुलाकात पर लगाए जा रहे राजनीतिक कयास

बिहार में इन दिनों राजनीतिक बाजार जरा गर्म दिख रहा है। यहां की सियासत में कौन-सा मोहरा कब अपनी चाल चल दे, इसका अंदाजा लगाना थोड़ा कठिन है। दरअसल लालू प्रसाद के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी से मिलने अचानक उनके आवास पर पहुंच गए जहां बंद कमरे में दोनों ने करीब 30 मिनट तक बातचीत की। इस मुलाकात में तेज प्रताप यादव और जीतन राम मांझी के अलावा बाकी लोगों को अंदर जाने की इजाजत नहीं थी। इस बातचीत के दौरान मांझी की बात टेलीफोन के जरिए तेज प्रताप ने लालू यादव से भी करवाई। अब इनके मुलाकात के बाद जीत पर राजनीतिक गलियारे से कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं।

परिवारिक मुलाकात बताया जा रहा
इस मुलाकात को लेकर तेज प्रताप ने कहा कि मेरे अंकल है और मैं उनसे मिलने हमेशा आता रहता हूं। आज गुजर रहा था तो मिलने आ गया। साथ ही मांझी ने भी इसे पारिवारिक मुलाकात ही बताया। मांझी ने कहा कि तेज प्रताप ने एक नए गैर राजनीतिक संगठन बनाने का ऑफर रखा है, जिसमें जुड़ने के लिए अनुरोध किया। इस संगठन में सभी पार्टियों के वरिष्ठ नेताओं को एक साथ मंच पर आने का आग्रह किया है। जिससे नई पीढ़ी को राजनीतिक तौर तरीके और मर्यादा समझा जा सके। मांझी ने कहा कि यदि ऐसा है,तो मैं इसमें साथ जुड़ने के लिए तैयार हूं।

लालू के जन्मदिन पर 10 मिनट तक बात
टेलीफोन पर मांझी ने लालू यादव से करीब 10 मिनट तक बातचीत की है। जिसके बारे में जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि,उन्होंने लालू प्रसाद यादव के जन्मदिन की मुबारक बात दी और उनकी लंबी उम्र की कामना की है। इसका किसी भी तरह का कोई राजनितिक मतलब नहीं निकाला जाए। यह पूरी तरह से पारिवारिक मुलाकात थी। वहीं राजनीति से जुड़े लोगों के मुताबिक इस मुलाकात के कई मायने लगाए जा रहे हैं।

गौरतलब हो कि जीतन राम मांझी ने बीते दिनों कुछ बयान बाजी की है। जिससे कई तरह के अनुमान लगाया जा सकते हैं। वहीं कांग्रेस नेता प्रेमचंद्र मिश्रा ने इस मुलाकात पर खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि मांझी की आरजेडी और कांग्रेस के साथ पहले से ही अच्छे संबंध रहे हैं। आने वाले दिनों में खुशखबरी मिल सकती है। इस भेंट के सियासी मायने हैं। बता दें कि बांका बम ब्लास्ट में बीजेपी ने मदरसा पर सवाल उठाया तो मांझी ने इसका करारा जवाब देते हुए कहा था कि,गरीबों के बच्चों को आतंकवादी और नक्सली बताया जाता है। इधर एनडीए में फिर से कोआर्डिनेशन कमेटी बनाने की मांग रखकर नई चर्चा छेड़ दी। हालांकि, अभी मांझी किसी भी तरह के बदलाव को स्वीकार नहीं कर रहे हैं। फिलहाल देखना तो यह है कि आखिर इसका परिणाम क्या होगा?

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