October 4, 2022

अफगानिस्तान पर तालिबान का कब्जा, आखिर क्या कर रहा है संयुक्त राष्ट्र?

Taliban capture Afghanistan, what is the United Nations doing?

टि्वंकल वाधवानी की रिपोर्ट

आज से 70 साल पहले 1945 में, द्वितीय विश्व युद्ध खत्म होने के बाद देश में शांति बनाए रखने के लिए एक अंतरराष्ट्रीय संस्था बनाई गई थी, जिसे संयुक्त राष्ट्र कहते हैं। आज जब अफगानिस्तान पर तालिबान का अधिकार हो गया है, तो गंभीर मानवीय संकट को देखते हुए संयुक्त राष्ट्र पर उम्मीद की जा रही है।

संयुक्त राष्ट्र ने की अपील

हाल ही के बयान में संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटेनियो गुटेरेश ने तालिबान से अपील की है कि वह अफगानिस्तान से सद्भावना के साथ बातचीत करें और साथ ही उन्होंने अन्य देशों से यह गुजारिश की है कि वे अफगानिस्तान के शरणार्थियों की मदद करें।

आखिर क्यों नहीं दखल दे सकता संयुक्त राष्ट्र

अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा और शांति बनाए रखने की जिम्मेदारी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की होती है, जो संयुक्त राष्ट्र के 6 अंगों में से एक है। संयुक्त राष्ट्र एक स्वतंत्र संगठन नहीं है। उसके 5 सदस्य अमेरिका, रूस, ब्रिटेन, चीन और फ्रांस हैं, जिनके सहमति के बिना संयुक्त राष्ट्र केवल अपील मात्र ही कर सकता है। वह कोई निर्णय नहीं ले सकता है।

अफगानिस्तान की स्थिति की जटिलता के कारण संयुक्त राष्ट्र का दखल देना और भी मुश्किल हो जाता है, क्योंकि रूस और चीन जैसे देश अभी भी तालिबान के पक्ष में हैं और जब तक सभी 5 सदस्य सहमत ना हो, संयुक्त राष्ट्र कुछ नहीं कर सकता है। परंतु संयुक्त राष्ट्र को जिस मकसद से बनाया गया था, उसकी प्रासंगिकता पर सवाल उठ रहे हैं और अफगानिस्तान में संकट की स्थिति को देखते हुए सोशल मीडिया पर संयुक्त राष्ट्र के खिलाफ जबर्दस्त आलोचनाएँ हो रही हैं।

तो क्या संयुक्त राष्ट्र ने अफगानिस्तान मामले में कोई मदद नहीं की

परंतु यह कहना भी गलत होगा कि संयुक्त राष्ट्र ने अफगानिस्तान के मामले में कोई कार्य नहीं किया है। भले ही वह राजनीतिक संघर्षों में हस्तक्षेप नहीं कर रहा हो, परंतु उसने अपने अलग-अलग एजेंसियों द्वारा कई बार मानवीय मदद मुहैया कराई है। चाहे वह चिकित्सा के क्षेत्र में हो, लड़कियों को शिक्षा उपलब्ध कराना हो, या हिंसा से जूझ रहे लोगों को पुनर्वास की सुविधा के क्षेत्र में हो।

परंतु लगातार कई देशों में युद्ध होने से संयुक्त राष्ट्र के मानवीय मदद पर भी खतरा उत्पन्न हो सकता है। अफगानिस्तान के मामले में भले ही तालिबान ने संयुक्त राष्ट्र के मानवीय मदद की सुरक्षा का दावा किया हो, परंतु यह तो भविष्य ही बता सकता है। और रही बात अफगानिस्तान के आवाम की सुरक्षा की तो संयुक्त राष्ट्र के सभी सदस्यों की सहमति के बिना कोई राजनीतिक फैसला लेना संयुक्त राष्ट्र के हाथों में नहीं है।

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