October 5, 2022

यूपी पुलिस द्वारा जारी मुहर्रम एडवाइजरी पर मचा बवाल, विलेन की तरह पेश किया जा रहा है बोले मुस्लिम धर्मगुरु

There is a ruckus on the Muharram advisory issued by the UP Police, the Muslim religious leader is being presented like a villain

क्षितिज यादव की रिपोर्ट

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में मुहर्रम के जुलूस एवं ताजिया निकालने पर लगी रोक का उतना विरोध नहीं हो रहा है जितना कि पुलिस द्वारा जारी किए गए एडवाइजरी पर। रविवार को उत्तर प्रदेश सरकार ने मुहर्रम जुलूस पर रोक लगाते हुए एक एडवाइजरी जारी किया। उस दिशानिर्देश के एक हिस्से को लेकर मुस्लिम धर्म गुरुओं में नाराजगी हो गई है।

दरअसल इस गाइडलाइन के चौथे पॉइंट में लिखा है-पुराने लम्बित धार्मिक एवं साम्प्रदायिक प्रकरणों तथा ऐसे नये उठने वाले विवादों, अपरम्परागत धार्मिक जुलूसों एवं कार्यो, यौन संबंधी घटनाओं, गौवंश वय/परिवहन आदि घटनाओं को लेकर पूर्व में अनेक अवसरों पर सम्प्रदायिक सद्भाव प्रभावित होता रहा है. उक्त के दृष्टिगत विशेष सर्तकता अपेक्षित है। इसके अतिरिक्त इस गाइडलाइन के अन्य हिस्सों में भी शिया सुन्नी संबंधी मतभेदों को दर्शाया गया है।

सरकार द्वारा सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश का आरोप

वैसे तो मुहर्रम के जुलूस एवं ताजिया निकालने पर लगी रोक का मुख्य कारण कोविड-19 की तीसरी वेव को लेकर आशंका की है। इस सर्कुलर को देखकर ऐसा लगता है कि सरकार द्वारा इसे पूरी तरह से सांप्रदायिक बनाने की भी कोशिश है। वरिष्ठ शिया धर्मगुरु मौलाना कल्बे जवाद ने कहा कि ऐसा करके सरकार ना सिर्फ शिया सुन्नी बल्कि हिंदू मुस्लिम भाईचारे को खराब करने की कोशिश की है। आगे मौलाना ने कहा कि यह गोलियों भरा खत है, जिसमें हमारे समुदाय को गाली दी गई है। उन्होंने कहा कि हम तो कोविड-19 मे खुद ही जुलूस ना निकालने के पक्ष में थे फिर ऐसा क्यों किया गया सरकार इसे वापस ले।

सालों से जारी होता आया है यही सर्कुलर

विवाद को बढ़ता देख एडीजी प्रशांत कुमार ने बताया कि सालों से यही सर्कुलर जारी होता आया है। इसमें कुछ नया नहीं जोड़ा गया है। गौरतलब है कि लखनऊ में 1977 में मुहर्रम जुलूस के वक्त सांप्रदायिक हिंसा हुई थी जिसके बाद मुहर्रम जुलूस पर रोक लगा दी गई थी। 1998 में तीन पक्षीय समझौते के साथ फिर से जुलूस निकालने को मंजूरी दी गई है। बीते 23 सालों में दोबारा हिंसा नहीं हुई। इस पर मौलाना का कहना है कि 43 साल पहले हुए बवाल का जिक्र आज करके क्यों साम्प्रदायिक माहौल तैयार किया जा रहा है।

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