पंडित सुधांशु तिवारी की रिपोर्ट


मीराबाई चानू (MiraBai Chanu) के ओलंपिक में सिल्वर मेडल जीतने के बाद यकायक पूरे देश का ध्यान मणिपुर की महिलाओं (Women Of Manipur) पर गया है. आपको जानकार हैरानी होगी कि यहां की महिलाएं हमेशा से पुरुषों से आगे रही है. इसका सबसे बड़ा उदाहरण है ईमा केथिहल (Ima Keithal) मार्केट. इंफाल के खवैरंबंद बाजार में स्थित यह मार्केट शहर के दिल की धड़कन है.

15वीं शताब्दी में बनी एशिया की इस सबसे बड़ी महिला मार्केट को पूरी तरह महिलाएं ही चलाती हैं. यह मार्केट एक संस्थान की तरह काम करता है और इसके खुद के अपने अधिकार हैं. कई महिलाएं तो यहां पीढ़ियों से दुकानदार कर रही हैं. यहां हर तरह के आइटम बिकते हैं, जिसमें हैंडीक्राफ्ट सामान, खिलौने कपड़े, सौंदर्य प्रसाधन, खाने का सामान, मसाले, सब्जियां, मीट और वो सारे सामान बिकते हैं, जो घरों में इस्तेमाल होते हैं. ये मार्केट 500 साल पुराना इतिहास अपने साथ समेटे हुए है.

उस समय से जब इम्फाल में मुद्रा का चलन नहीं होता था तब भी यहां की महिलाएं सामान एक दूसरे के साथ आदान प्रदान करती थीं. मार्केट की तीन बिल्डिंगों में क्या करना है और क्या नहीं करना है, इसके नियम भी बने हैं. मार्केट में सबसे सख्त नियम है कि यहां पर पुरुष न तो व्यापार कर सकते हैं न ही कोई सामान बेच सकते हैं. हां पुरुषों को सामान खरीदने के लिए यहां प्रवेश मिलता है.

बीबीसी की एक रिपोर्ट कहती है कि शायद ये मार्केट पूरी तरह इसलिए महिलाओं का रहा होगा क्योंकि मणिपुर के मैती जनजाति के पुरुष बड़े पैमाने पर चीनियों और बर्मियों से जंग में लगे रहते थे. इसलिए महिलाओं के ऊपर ही परिवार की देखरेख की जिम्मेदारी आ गई. यहां पर केवल आर्थिक लेन देन ही नहीं होता बल्कि यहां कई बार महिलाएं राजनीतिक स्टैंड लेती हैं.

यहां कुछ उन औरतों को भी दुकान के लिए जगह अलाट की जाती है, जो विधवा हैं, अकेली हैं या जिनके पति मार दिए गए. चूंकि ये बाजार काफी फेमस है लिहाजा इसे देखने के लिए काफी बड़ी संख्या में टूरिस्ट आते हैं. यहां आमतौर पर महिला दुकानदार परपंरागत वस्त्रों फंकेत में नजर आती हैं. ये महिलाएं इस बाजार के जरिए इतना कमा लेती हैं कि अपने घर को बहुत अच्छी तरह से चला सकती हैं

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