October 4, 2022

हर साल बाढ़ आने पर भी सरकार की व्यवस्था क्यों ढीली पड़ जाती है ?

Why does the system of government loosen up even when there is a flood every year?

प्रिया सिंह की रिपोर्ट

बरसात का मौसम आते ही गांव वासियों और गंगा के तट रह रहे शहर वासियों के ऊपर बाढ़ का खतरा मंडराने लगता है,बाढ़ का पानी घरों में घुस जाता है जिससे लोगों का घरों में रहना मुश्किल हो जाता है। गांव का तो बात ही मत पूछिए गांव वालों के ऊपर बाढ़ आने से न सिर्फ उन्हें घरों में ही नहीं बल्कि उनके फसलों पर भी संकट या यूं कहें खतरे की घंटी बजने लगती है, जीवन अस्त-व्यस्त हो जाता है।

हवाई यात्रा द्वारा जायजा लेती सरकार

बात की जाए सरकार की व्यवस्था और सुविधा की तो, यह बरसात मौसम आते ही सड़क नालो और कच्ची सड़कों का हाल बेहाल हो जाता है। ऐसे में बाढ़ की समस्या सबसे बड़ा मुद्दा तब बन जाता है, जब प्रदेश की सरकार और मंत्री गण हवाई यात्रा कर बाढ़ पीड़ितों के छत से दिखने वाला विमान जिसमें राजनेता सवार होकर जमीनीस्तर का जायजा लेते हैं।

बाढ़ पीड़ितों की मदद में सरकारी खाते शुन्य के बराबर

बाढ़ आने से पहले सड़कों पर गड्ढे और नाले के बहते गंदे पानी से परेशान, फिर बाढ़ के आ जाते ही,जनजीवन अस्त-व्यस्त का संकट घेर लेता है। जबकि सरकार की बैठक और राज्य स्तरीय एवं जनसभा में दिए गए उपदेशों में पीड़ितों की मदद का ऐलान होता है। लेकिन जब इस ऐलान को पूरा करने का समय आता है, तो सरकारी खाता शुन्य के बराबर हो जाता है। मानो सरकारी खाते में ही बाढ़ आ गया हो।
ऐसे में गांव के लोगों का नुकसान की भरपाई सरकार नहीं कर पाती, और वही बाढ़ का पानी जाते ही गांवों तथा शहरों में महामारी का प्रकोप छा जाता है।

कैसे निजात पाऐगी गांव एवं शहर बाढ़ के भयावह संकट से

बाढ़ की भयानक रूप बनने से पहले ही, गांव एवं शहरों के नालों की मरम्मत, एवं NDRF फोर्स एवं बालू भरे बोरे में गंगा की तटीय स्थान पर रखने से लेकर कई सारी सरकारी सुविधाओं से बाढ़ की समस्या से बचा जा सकता है।

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