October 5, 2022

क्या पाकिस्तान के लिए ‘भस्मासुर’ बनेगा तालिबान ?

टि्वंकल वाधवानी की रिपोर्ट

अफगानिस्तान: काबुल में तालिबान के अधिकार के साथ चीन, रूस और पाकिस्तान जैसे सभी देश उसके समर्थन में आगे आ गए थे, परंतु तालिबान को जितना समर्थन पाकिस्तान से मिला है, शायद ही उतना किसी और देश से मिला होगा। चाहे वह गोला-बारूद मुहैया करवाना हो या अपने सैनिकों को वापस ना बुला कर समर्थन देने में हो। इमरान खान ने तालिबान का समर्थन करते हुए कहा था कि ‘अफगानिस्तान’ को तालिबान ने गुलामी की बेड़ियों से मुक्त कराया है, परंतु तालिबान ने पाकिस्तान को ऐसा झटका दिया है कि इमरान खान ने सपने में भी नहीं सोचा होगा।

तालिबान से पाकिस्तान को हो सकता है खतरा

तालिबान के प्रवक्ता सोहेल साहिब ने पाकिस्तान से साफ साफ कहा है, कि वह भारत के खिलाफ अपनी सरजमीं का इस्तेमाल नहीं होने देगा। साथ ही ब्रिटिश आर्मी के पूर्व कमांडर कर्नल रिचार्ज कैंप ने पाकिस्तान को यह चेतावनी दी है कि उनके हथियारों पर तालिबान की काली नजर है। इसी कारण यह आशंका जताई जा रही है कि तालिबान पाकिस्तान के लिए भस्मासुर साबित हो सकता है।

तालिबान-पाकिस्तान की दोस्ती है पुरानी

दरअसल पाकिस्तान और तालिबान की दोस्ती काफी पुरानी है। पाकिस्तान ने 1980 के दशक में सोवियत संघ के खिलाफ लड़ने वाले अफगानों को हथियार मुहैया कराए थे। साथ ही पाकिस्तान ने अपने लगभग 30 लाख अफगान शरणार्थियों को कट्टरपंथी बनाकर तालिबान में भर्ती भी करवाया था।

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