October 4, 2022

हर साल 13 अगस्त को विश्व अंग दान दिवस (World Organ Donation Day) मनाया जाता है।: अंग दान महादान

World Organ Donation Day is celebrated every year on 13th August.: Organ Donation Mahadan

अमरेंद्र पांडेय की रिपोर्ट

अगर ज़्यादा से ज़्यादा लोग अंग दाता बनेंगे तो अंग खराब होने के कारण अपनी जान गंवाने वाले कई लोगों को बचाया जा सकता है। हर साल 13 अगस्त को विश्व अंग दान दिवस (World Organ Donation Day) मनाया जाता है, जबकि भारत मे इसे 27 नवंबर को।

नई दिल्ली, लाइफस्टाइल डेस्क। World Organ Donation Day 2021: दुनियाभर में ऐसे हज़ारों लोग हैं जिन्हें दिल, लिवर, किडनी, आंखें, फेफड़े, पैनक्रियाज़ आदि जैसे महत्वपूर्ण अंगों की सख्त जरूरत है। इनमें से कुछ ही लोगों को समय पर अंग मिल पाता है। जीवन रक्षक अंगों की कम आपूर्ति की पीछे जिसको लेकर जागरूकता की कमी एक बड़ा कारण है।

इसलिए, विश्व अंग दान दिवस का उद्देश्य अधिक से अधिक लोगों को पंजीकृत अंग दाता बनने के लिए प्रोत्साहित करना और निधन के बाद पर अपने स्वस्थ अंगों को दान करने का संकल्प लेना है। अगर ज़्यादा से ज़्यादा लोग अंग दाता बनेंगे, तो अंग खराब होने के कारण अपनी जान गंवाने वाले कई लोगों को बचाया जा सकता है।

… जब मिले दूसरों को जीवनदान तो क्यों न करें अंगदान

एक दिन हम सभी को इस दुनिया को अलविदा कह कर चले जाना है। लेकिन जाते-जाते अगर हम किसी दूसरे को जिंदगी दे जाएं तो इससे बड़ा पुण्य का काम कोई नहीं हो सकता। अंग दान कर हम किसी को नयी जिंदगी दे सकते हैं।

•• देश में हर साल 1.5 लाख किड़नी की जरूरत पड़ती है, जबकि 3 हजार मुहैया हो पाती है।

•• मरीजों को 25 हजार नए लीवर की आवश्यकता होती है लेकिन हासिल हो पाते है सिर्फ 800।

•• 60 लाख नेत्रहीनों लोगों को आंखों की जरूरत होती है, लेकिन 22, 384 लोगों को ही हासिल हो पाती है।

अंग प्रत्यर्पण के लिए एक समय सीमा तय होती है, जिसका ध्यान रखना बेहद ज़रूरी है।

  • मौत के 6 घंटे बाद हृदय और फेफड़े
  • मौत के 12 घंटे बाद लिवर
  • मौत के 24 घंटे बाद अग्न्याशय
  • मौत के 48 घंटे बाद किडनी का प्रत्यर्पण किया जा सकता है।

अगर आप किसी को जीवनदान देने के लिए अंगदान के लिए तैयार है तो अंगदान की पहली शर्त जान लें. अंगदान के लिए व्यक्ति का स्वस्थ होना सबसे महत्वपूर्ण है साथ ही वह एचआईवी, डायबिटीज, कैंसर, गंभीर संक्रमण, किडनी और हृदय रोगों से पीडि़त न हो।

देश में हर साल 1.5 लाख किड़नी की जरूरत पड़ती है, जबकि 3 हजार मुहैया हो पाती है। मरीजों को 25 हजार नए लीवर की आवश्यकता होती है लेकिन हासिल हो पाते है सिर्फ 800। 60 लाख नेत्रहीनों लोगों को आंखों की जरूरत होती है, लेकिन 22, 384 लोगों को ही हासिल हो पाती है।

अधिकांश लोग अंग दाता बनने के लिए पंजीकरण करा सकते हैं, चाहे उनकी उम्र कुछ भी हो। अगर कोई व्यक्ति 18 वर्ष से कम आयु का है, तो उसे अंगदान करने के लिए माता-पिता या वयस्क अभिभावक की सहमति की आवश्यकता होती है।

अगर मृत्यु के बाद अंगदान के लिए पंजीकरण कराया जाता है, तो एक व्यक्ति का चिकित्सक मूल्यांकन किया जाता है ताकि मेडिकल टीम उनके स्वास्थ्य की जांच कर सके और कौन से अंग दान किए जा सकते हैं इसका फैसला कर सके। मृत्यु के बाद अंगदान के इस रूप को शवदान कहा जाता है।अंगदान का दूसरा रूप तब होता है।

जब कोई व्यक्ति जीवित होता है। इस तरह का दान किडनी और लिवर जैसे कुछ अंगों तक ही सीमित है। किडनी मनुष्य के पास दो होती है, वो एक दान कर दूसरे पर जीवित रह सकता है। वहीं, लिवर दान के दौरान इस अंग का एक हिस्सा निकाला जाता है, जिसमें दौबारा बढ़ने की क्षमता होती है।

Leave a Reply