October 5, 2022

Bihar Panchayat Election : बिहार में पंचायती चुनाव के तारीखों का हुआ ऐलान ,24 सितंबर से 11 चरणों में होंगे मतदान

Bihar Panchayat Election: Dates announced for Panchayati elections in Bihar, voting will be held in 11 phases from September 24

प्रखर दुबे की रिपोर्ट

बिहार:(BIHAR ELECTION COMMISSION) बिहार में पंचायती चुनावों को लेकर की गयी बड़ी घोषणा 24 सितंबर से होगी मतदान की प्रक्रिया प्रारंभ ।चुनाव की तिथियों को निर्धारित कर राज्यपाल की अनुमति के लिए भी रिपोर्ट भेजी जा चुकी है ।अनुमानित 24 अगस्त तक संपूर्ण सूचना प्रदान कर दी जायेगी।

कार्यावधि समाप्त होने के कारण चुनाव कराना आवश्यक

पंचायती राज विभाग द्वारा बताया गया कि 2016 में पंचायत एवं ग्राम कचहरी के आम चुनाव से गठित त्रिस्तरीय पंचायत एवं ग्राम कचहरी की कार्यविधि जून 2021 में समाप्त हो गई है। इसलिए राज निर्वाचन आयोग बिहार के अनुशंसा के आलोक में त्रिस्तरीय पंचायत ग्राम कचहरी के विभिन्न पदों के लिए 11 चरणों में चुनाव कराए जाएंगे।

त्रिस्तरीय चुनाव में 6 पदों को लेकर होंगे चुनाव, EVM मशीनों का दूसरे राज्यों से होगा निर्यात

सूत्रों के अनुसार बताया जा रहा है कि 6 पदों को लेकर चुनाव होने है।मुखिया, पंच, सरपंच, वार्ड सदस्य, पंचायत समिति सदस्य और जिला पंचायत सदस्य के पद शामिल हैं। जिसमे 1 लाख 88 हज़ार EVM मशीनों की आवश्यकता पड़ेगी ।मुखिया वार्ड मेंबर पंचायत समिति और जिला परिषद की वोटिंग ईवीएम से तो पंच और सरपंच पद के लिए वोटिंग बैलेट पेपर से कराया जाएगा। ज़रूरतों को ध्यान में रखते हुए अन्य राज्यों से EVM मशीनों के निर्यात की भी योजना बन रही है ।

6 पदों के लिए 129 चुनाव चिन्ह रखे गए और करीब दो लाख 70 हज़ार पदों पे होंगे चुनाव

निर्धारित 6 पदों के लिए 129 चुनाव चिन्ह रखे गए जिनमे 14 चिन्हों को सुरक्षित रखा गया है ताकि अगर कोई प्रत्याशी चुनाव चिन्ह बदलना चाहे तो ,उसकी सुविधा हो और इस प्रक्रिया में किसी प्रकार की कोई दिक्कत ना हो।

इस बार कुल 2 लाख 59 हज़ार 260 पदों पर निर्वाचन होना है। इसमें मुखिया के 8,387 पद, सरपंच के 8,387 पद, वार्ड सदस्य के 1 लाख 14 हज़ार 667 पद, पंचायत समिति सदस्य के लिए 11 हज़ार 491 पद, जिला परिषद सदस्य के 1161 और पंच के 1 लाख 14 हज़ार 667 पदों के लिए चुनाव होना है।

क्या तीसरी लहर को लेकर सचेत है बिहार इलेक्शन कमीशन?

वैश्विक महामारी का खतरा अब भी बरक़रार है जिसमे तीसरी लहर कभी भी दस्तक दे सकती है। ऐसे में क्या चुनाव कराना इतना आवश्यक है और पिछले बार हुए राज्य स्तरीय चुनावों के वजह से ही दूसरी लहर ने तीव्रता पकड़ी थी । ऐसे में जनता को अपनी सुरक्षा स्वयं करनी होगी क्योंकि एक लोकतान्त्रिक राष्ट्र में चुनावों का सिलसिला रोक पाना मुश्किल है।

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