October 7, 2022

गुजरात हाई कोर्ट का बड़ा फैसला अंतर-धार्मिक विवाह में धोखा साबित हुए बगैर नहीं होगी एफआइआर

The big decision of the Gujarat High Court will not be an FIR in inter-religious marriage without proving cheating

सृष्टि भट्टाचार्य की रिपोर्ट

अहमदाबाद | गुजरात हाई कोर्ट ने लव जिहाद को लेकर महत्त्वपूर्ण फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा, बगैर यह साबित हुए कि शादी जोर-जबरदस्ती या प्रलोभन से हुई है, सिर्फ अंतर-धार्मिक शादी के आधार पर किसी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज नहीं की जा सकती।

इसी के साथ हाई कोर्ट ने गुजरात धर्म स्वतंत्रता (संशोधन) अधिनियम की कुछ धाराओं में संशोधनों को लागू करने पर रोक लगाने के आदेश दिए। हाई कोर्ट ने यह आदेश एक याचिका की सुनवाई के दौरान दिए ।

‘विवाह के सिद्धांतों के खिलाफ शर्ते’ : वर्चुअल सुनवाई के दौरान जमीयत उलेमा-ए-हिंद की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मिहिर जोशी ने कहा कि संशोधित कानून में अस्पष्ट शर्ते विवाह के मूल सिद्धांतों के खिलाफ हैं। ये संविधान के अनुच्छेद 25 में निहित धर्म के प्रचार, आस्था और अभ्यास के अधिकार के भी खिलाफ हैं।

अधिनियम के प्रावधान : अधिनियम के मुताबिक धर्मांतरित व्यक्ति के माता-पिता, भाई, बहन, उसके रक्त संबंधियों, शादी या गोद लेने के जरिए बने रिश्तेदारों को एफआइआर दर्ज कराने का अधिकार है।

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