काबुल: 15 अगस्त का वह पावन दिवस, जब भारत देश स्वतंत्रता दिवस की खुशियां मना रहा था, तब तालिबान ने काबुल पर कब्जा कर लिया| जिससे सभी आवाम अफरा-तफरी करने लगी और सभी जगह तालिबान की दहशत फैल गई। सबसे पहले तालिबान ने जलालाबाद पर अपना कब्जा किया और फिर 15 अगस्त की सुबह इस खबर ने सबको चौंका दिया कि काबुल भी अब तालिबान के कब्जे में है.

इस खबर से लोगों में डर का माहौल पैदा हो गया| इतना ही नहीं शाम होते-होते तालिबान ने काबुल पर भी अपना शासन जमाना शुरू कर दिया| सबसे पहले उसने सिरोही जिला (काबुल) पर अधिकार किया और धीरे-धीरे अन्य जिलों पर भी| अब काबुल के 34 जिलों में से 5 जिले ही शेष रह गए हैं ।


तालिबान ने जब जलालाबाद में कब्जा किया, तो वहां के गवर्नर जिया-उल-हक ने हार मान कर तालिबान से हाथ मिला लिया| गवर्नर जिया-उल-हक का कहना है कि उन्होंने यह कार्य जनता की भलाई के लिए किया है | काबुल पर कब्जा करने के बाद तालिबान ने अफगानिस्तान के राष्ट्रपति भवन पर आक्रमण किया, जहां अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी मौजूद थे| वहाँ कुछ देर सलाह-मशवरा करने के बाद अशरफ गनी अफगानिस्तान छोड़कर भाग गए| उनके साथ अफगानिस्तान के उपराष्ट्रपति अमरूल्ला सालेह भी ताजिकिस्तान रवांना हो गए| लोगों में इतनी दहशत फैल गई कि पूरी आवाम देश छोड़कर भागने लगी ।

सभी अफगानिस्तान के पड़ोसी जगह ताजिकिस्तान और ईरान आदि जगह भागने लगे जिससे हर तरफ अफरा-तफरी का माहौल हो गया । सड़कों पर ट्रैफिक जाम के साथ-साथ एयरपोर्ट, हवाई अड्डों और रेलवे स्टेशनों में भी भारी मात्रा में भीड़ दिखाई देने लगी.

अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी का कहना है कि ऐसे समय में उनका यह फैसला जनता की रक्षा के लिए है और वह खून-खराबा नहीं चाहते थे| । उन्होंने यह बात सोशल मीडिया के जरिए जनता तक सांझा की है। तालिबान ने काबुल पर कब्जा करने के साथ ही यह भी ऐलान किया है कि देश में फिर से इस्लामिक शरिया कानून को लाया जाएगा ।

तालिबान का इतिहास

1990 के दशक से ही पाकिस्तान और आईएसआई के सिक्रेट जासूसों का सपोर्ट तालिबान को मिलता रहा है । 1998 में भी तालिबान ने अफगानिस्तान की राजधानी काबुल पर कब्जा किया था और उस समय भी शरिया कानून को लागू किया था । तालिबान के सशक्त होने का मुख्य कारण उसे पाकिस्तान से प्राप्त आर्थिक सहायता है| तालिबान ने पहले भी कठोर कानून लागू किया है, जैसे- चोरी करने पर शरीर के अंग काट देना, सड़क के बीचों-बीच सरेआम सजा देना,

महिलाओं के साथ ज्यादतियां करने पर हत्या कर देना, बुढ़ो को दाढ़ी बढ़ाने के लिए कठोर कानून, महिलाओं को बुर्खे में रहने और शरीर को कपड़े से ढक के रखने का आदेश, 10 साल से अधिक आयु वाली लड़कियों को पढ़ने से मना, साथ ही उसने नाच गाना संगीता आदि पर भी रोक लगाया था| यह सभी कानून 1998 में जब तालिबान ने काबुल पर कब्जा किया, तब लगाया गया था । अब एक बार फिर 15 अगस्त 2021 को काबुल पर कब्जा करने के बाद तालिबान ने उसी कानून को दोबारा लागू करने का निश्चय किया है ।

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